गोपाल झा ,महोत्तरी , श्रावण ८ गते संसारमे बहुत लोक छथि, जे जीवनभरि घर बनबैत रहै छथि, मुदा बहुत कम लोक छथि, जे घरक आत्माकेँ बचा पबै छथि । कारण, घर मात्रे टा ईंट, बालु , सिमेन्ट आ रङ्ग–रोगनसँ नहि बनैत अछि । घर बनैत अछि मायकेँ ममता सँ, पिताक परिश्रमसँ, दादी–नानीक कथासँ, आँगनमे बच्चाक […]