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२०७६ चैत्र ६, बिहीबार १२:०५

झूठ फूस सभ बात केलक ओ
दावा के बरसात केलक ओ

बाईस जिल्ला के आठ बनौलक
१४ के लोकके कात केलक ओ

जाति में बँटलक भोट के खातिर
एहने सँस्कृति आयात केलक ओ

मुँह में राम बगलमें छुरा
भीतर भीतर घात केलक ओ

मुद्दा कहियो सुलझि ने पावए
पैदा एहन हालात केलक ओ

लहाश पर चढ़ि कs सत्ता पओलक
खुशी सँ भोज भात खेलक ओ

जाहि माय के दुध ओ पिलक
ओकरे छाती पर लात धेलक ओ…
घन्श्याम जि के फेस बुकमे भेटल बहुत सुन्दर कविता

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