Advertisement
ताजा खबर

मगही भाषाकाे गजल

प्रतिक्षा खबर
२०७७ भाद्र १५, सोमबार २०:५१

सुनु,सुनु सबकोई सुनु !
माई के गुङी चिख सुनु !!

हमर मनके बात सुनु!
मगही के गावल गीत सुनु!!

हे भाषा के भाषाबिद सुनु !
एगो माईके भेदित बात सुनु !!

आईल हो आंच आई माई पर !
पहिचान के लेल अवाज सुनु !!

राखेला पर्दा मे खोजले हय
सब मिल के पर्दाफास करु !!

मगही के ई साख सुनु !
मगहीके अटकल बात सुनु

मगही मे गबित गीत सुनु !
जग मे कोयल सन राग भरु !!

दिन बित गेलै से बन्द रहल !
आब मगही रुपि फुलित गुलाब देखु !!

जे ज्ञान के पाठ सिखइले हय
ओई ज्ञान से ओकरा उदय करु !!

ईतिहासके गन्दा खेल बुझु !
मगही के झण्डा उच्च करु !!

सुनु,सुनु सबकोई सुनु!
माई के गुङी चिख सुनु!!!

खाली भाषा न पहिचानो हय मगही ।
जनबोलिमे ,समाजके अलगे सान हय मगही।।

हमरा भितरके जागर हय मगही।
ममताके सागरमे रहल तलाव हय मगही।।

ममताके रसपान करु !
पहिचान के हि स्वभिमान बुझु!!

राखेला पर्दा मे खोजले हय!
सब मिल के पर्दाफास करु!!

हे भाषा के भाषाबिद सुनु!
माई मगही के अवाज सुनु!!

-धन्यवाद –
गजलकार:- राजु महतो
ठेगाना :- मनरा सिस्वा नगरपालिका

तपाईको प्रतिक्रिया !

ADVERTISEMENT

ताजा खबर


सम्बन्धित खबर