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ई हमर घर मात्रे टा नै अछि, ई हमर जडि़, ई हमर बचपनाक स्मृति अछि आ हमर संस्कारक जीवित इतिहास अछि मधेश सरकारको सञ्चार नीतिप्रति साङ्गठनिक विरोध: एकपक्षीय निर्णय र संस्था समाप्त पार्ने खेल रोकियोस् सोनम वाङचुकले तोडे २६ दिने अनशन सर्लाहीको नारायणपुर नाकाबाट भारततर्फ लैजान लागिएको मदिरा बरामद दिनभरि निगरानी, राति तस्करीलाई संरक्षण ? महोत्तरीको पोखरभिण्डा बीओपीमाथि गम्भीर आरोप जानकी मन्दिरबाट लखेटिए हर्क साम्पाङका कार्यकर्ता एकडारा गाउँपालिकामा नियमित खोप सेवा अब वडा नं. १ का चार स्थानबाट, जन्मदेखि २३ महिनासम्मका बालबालिकाले पाउने सुविधा समायोजन विवादका कारण लोसपा र जसपा नेपालले बोलाए छुट्टाछुट्टै बैठक राप्रपा सांसद खुश्बु ओलीको चरित्रहत्या गरेको आरोपमा २ जना पक्राउ अदालतबाट हतकडीसहित थुनुवा फरार
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ई हमर घर मात्रे टा नै अछि, ई हमर जडि़, ई हमर बचपनाक स्मृति अछि आ हमर संस्कारक जीवित इतिहास अछि

प्रतिक्षा खबर
२०८३ श्रावण ८, शुक्रबार १८:४९

गोपाल झा ,महोत्तरी , श्रावण गते

संसारमे बहुत लोक छथि, जे जीवनभरि घर बनबैत रहै छथि, मुदा बहुत कम लोक छथि, जे घरक आत्माकेँ बचा पबै छथि । कारण, घर मात्रे टा ईंट, बालु , सिमेन्ट आ रङ्ग–रोगनसँ नहि बनैत अछि । घर बनैत अछि मायकेँ ममता सँ, पिताक परिश्रमसँ, दादी–नानीक कथासँ, आँगनमे बच्चाक किलकारी सँ बुढ जुवानके हँसीसँ, आ पूर्वजक आशीर्वाद सँ । जाहि घरमे ई सभ जीवित अछि, से घर नहि ओ एकटा जीवित संस्कृति अछि ।

दुर्भाग्यक विषय अछि जे आइ विकासक नाम पर हम अपन घरक आत्माकेँ धीरे–धीरे गँवा रहल छी । पुरान घरकेँ पुरान सोच मानि क  तोड़ि रहल छी, मुदा शायद ई नहि सोचैत छी जे देवाल गिरैत–गिरैत स्मृति सेहो ढहि जाइत अछि । जखन पुरान आँगन समाप्त होइत अछि, तखन केवल माटि नहि हराइत अछि ओतय बचपन सेहो हराइत अछि, संस्कार हराइत अछि, परिवारक आत्मीयता हराइत अछि ।        हमर ई घर… ई मात्र एकटा भवन नहि अछि । ई हमर जन्मक पहिल साक्षी अछि । हमर पहिल कानब, पहिल हँसी, पहिल डेग, पहिल असफलता, पहिल जीत—सभक गवाह ई माईटक टाट अछि । एहि आँगनमे हम धूलिमे खेललहुँ, वर्षाक पानिमे भीजलहुँ, चन्द्रमाक उजासमे दादीसँ खिस्सा  सुनलहु ँ। एहि घरमे दीयाबातिक दीप जरल, छैठके गीत गुञ्जल, विवाहक मंगलध्वनि उठल, आ शोकक क्षणमे सभ समाज सभ एक–दोसराके कन्हा बनल । जीवनक सम्पूर्ण चक्र एहि घरक चौखट पर पूरा भेल ।

आइ जखन शहरक चमक–दमक लोककेँ आकर्षित क रहल अछि, तखन गामक घर धीरे–धीरे सुनसान भऽ रहल अछि । दुवाईर पर बैसल बुढ़–बुजुर्ग प्रतीक्षा करैत छथि—“केहन दिन आएत जखन फेर बच्चासभ एहि आँगनमे दौड़त“ मुदा अधिकांश आँगन आब निस्तब्ध अछि । तुलसी चौरा पर दीप कम जरैत अछि, चुल्हाक धुँआ कम उठैत अछि, आ साँझक ओ सामूहिक अपनापन मोबाइलक स्क्रीनमे हराइत जा रहल अछि ।        ई केवल एकटा परिवारक कथा नहि अछि । ई सम्पूर्ण समाजक चिन्ताक विषय अछि । जखन परिवार घरसँ दूर होइत अछि , तखन केवल दूरी नहि बढ़ैत अछि , संस्कारक डोर सेहो कमजोर होइत अछि । बच्चासभकेँ आधुनिक शिक्षा तँ भेटि रहल अछि, मुदा दादीके ओ खिस्सा पेहानी नहि । अंग्रेजी भाषा तँ आबि रहल अछि, मुदा मातृभाषाक मिठास हराइत जा रहल अछि । महँग उपहार तँ भेटैत अछि, मुदा मायकेँ हाथक स्नेह नहि भेट पबैत अछि ।

हम ई नहि कहैत छी जे विकास नहि हो । अवश्य होय । नव घर बनने, आधुनिक सुविधा आबए, शहर बढो । मुदा एहन विकासक की अर्थ, जाहिमे अपन जड़िकेँ काटि देल जाए? जड़ि कटला पर वृक्ष कत धरि हरियर रहत? अपन इतिहाससँ कटला पर समाज कतय धरि जीवित रहत? घरक वास्तविक मूल्य बजार तय नहि करैत अछि । ओकर मूल्य बैंकके कागज नहि  लिखैत अछि । ओकर मूल्य ओ आँखिक नोर बतबैत अछि , जे बरखौं बाद अपन पुरान घर देखिते छलकि पड़ैत अछि । ओ मूल्य ओ बूढ़ माय–बाबूक प्रतीक्षा बतबैत अछि, जे प्रतिदिन दुआईर पर नजरि गड़ौने रहैत छथि । ओ मूल्य ओ आँगन बतबैत अछि, जत आबो बच्चाके पएरक निशान माटिमे जीवित छथि ।

समाजकेँ आब फेरसँ घरक अर्थ बुझबाक आवश्यकता अछि । बच्चाकेँ केवल महँग स्कूल नहि, अपन गाम, अपन खेत, अपन पोखरि, अपन भाषा, अपन लोकगीत आ अपन संस्कृतिक सेहो शिक्षा देबाक आवश्यकता अछि । कारण, जकर जडि़ मजबूत होइत अछि , ओहि वृक्षक शाखा आकाश धरि पहुँचैत अछि ।

हमर ई घर पुरान भऽ सकैत अछि, देवालमे दरारि पडी़ सकैत अछि, छप्पर बदलि सकैत अछि, मुदा एहि घरक आत्मा अमर अछि । ई घर हमर पूर्वजक तपस्या अछि, हमर माय–बाबूक संघर्ष अछि, हमर बचपनाक हँसी अछि, हमर संस्कारक विद्यालय अछि ।

आइ हम सभसँ एकटा प्रश्न पूछए चाहैत छी—जँ काल्हि ई घर नहि रहत, तँ की हमर बच्चासभकेँ कहबाक लेल किछु रहत जे “एतहि हमर जडि़ छल“< की ओहो एहन गर्वसँ कहि सकत जे “ई हमर घर मात्र नहि, हमर पहिचान अछि“

घर बचाउ । आँगन बचाउ । संस्कार बचाउ । कारण, जँ घर बचल रहत तँ परिवार बचत । परिवार बचत तँ समाज बचत । समाज बचत तँ संस्कृति बचत । आ संस्कृति बचत तँ हमर अस्तित्व सदिखन जीवित रहत ।

किएक तँ अन्ततः सत्य एकेटा अछि—      “ हमर घर मात्रे टा नै अछि हमर जड़ि अछि हमर बचपनाक स्मृति अछि हमर संस्कारक मन्दिर अछि हमर पूर्वजक आशीर्वाद अछि धरोहर अछि, जाहि पर हमर भविष्यक सम्पूर्ण पहिचान टिकल अछि

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